Bhabhi ko pragnent kar ke maa banaya

हेल्लो दोस्तों, कैसे है आप सभी लोग? आशा करता हूँ कि सब बढ़िया ही होंगे। मेरा नाम हरीश है ओर मैं अभी कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही जॉब भी करता हूँ। मैं रोज़ाना ही यहां पर सेक्स स्टोरी पड़ता रहता हूँ आज मुझे भी अपनी सच्ची स्टोरी को सुनाने का मौका मिल रहा है। सबसे पहले में बता दूँ कि मैं राजस्थान के एक छोटे से गांव का रहने वाला एक गरीब परिवार का लड़का हूँ। तो चलिए मैं अपनी कहानी की तरफ बढ़ता हूं।

बात उस समय की है जब मेरे कॉलेज की परीक्षा चल रही थी और मैं इसी वजह से कुछ दिनों से घर पर ही बैठ कर पढ़ाई कर रहा था और इसी दौरान में जॉब पर भी नही जा रहा था। हमारे घर के ठीक सामने ही एक अमीर परिवार रहता था। उस परिवार में एक अंकल, आंटी उनके एक बेटे के साथ रहते थे। उनका परिवार काफी अमीर था और कुछ एक साल पहले ही उनके बेटे की शादी हुई थी। उनके बेटे की जिस लड़की से उनकी शादी हुई थी वो काफी खूबसूरत लड़की थी। उस लड़की का नाम शैली था। मैं उन्हें भाभी कहकर बुलाता था। शैली भाभी की मेरे परिवार से काफी अच्छी बनती थी। वो भाभी अक्सर मेरे घर मे ऐसे ही बातें करने आया करती थी और मैं उन्हें घूर कर देखा करता था। वो भाभी गौरे रंग की एक दम टाइड ओर खूबसूरत माल थी। मुझे उस भाभी को चौदने की काफी ज्यादा इच्छा थी।

कुछ दिन जब मैं परीक्षा की वजह से घर मे था तो मैं भाभी का हमेशा इंतजार किया करता था कि वो कब घर आएगी। जब भी वो हमारे घर मे मम्मी के पास किसी भी काम के लिए आती थी मैं उन्हें स्पर्श करने का भी कोई मौका नही छोड़ता था। भाभी को अक्सर मेरी छोटी बहन से कुछ न कुछ काम पड़ता रहता था और वो घर पर आती रहती थी। इसी दौरान में उन्हें घूरा करता था साथ ही कई बार तो मैने उनके नाम की मुट्ठ मारना भी शुरू कर दिया था।

कुछ दिनों से में महसूस कर रहा था कि भाभी भी मेरी हरकतों को पहचान गयी है। अब वो भी मुझे घूरते हुए देखा करती थी और यहां तक कि वो मुझे देख कर स्माइल भी करने लग गयी थी। कुछ दिनों तक उनके घर आने से मैं भी भाभी से काफी बातें करने लग गया था। देखते ही देखते भाभी भी मुझे पसंद करने लगी थी। यही नही मेने तो भाभी से उनका नम्बर भी ले लिया था। अब हम दोनो रोज़ाना एक दूसरे से फ़ोन पर बातें किया करते थे। भाभी ओर मेने साथ मे चुपके से बाहर घूमना भी शुरू कर दिया था। ऐसे ही एक बार भाभी ओर में टॉकीज में एक रोमांटिक मूवी भी देखने गए थे तब मूवी के बीच मे ही मेने भाभी को होंठ पर हल्के से चूम लिया था। उन्होंने इस बात का बुरा नही माना था बल्कि बदले में उन्होंने भी जल्दी से मुझे होंठ पर चुम लिया था। देखते ही देखते मुझे पता ही नही चला था कि मुझे कब भाभी से प्यार होने लग गया था।

भाभी भी इस दौरान मुझसे प्यार करने लगी थी। बात तो वहां तक पहुंच गई थी कि हम दोनों एक दूसरे से बात किये बिना रह ही नही सकते थे। एक दिन की बात है मैं अपने घर मे ही परीक्षा की तैयार करने के लिए पढ़ाई कर रहा था। तभी मुझे भाभी के घर से लड़ाई करने की आवाज़ आने लगती है। आवाज़ सुनते हुए मेने पाया कि भाभी का का पति उनसे किसी बात पर झगड़ रहा है और यही नही शायद उनके साथ किसी बात पर मारपीट भी कर रहा है। मुझसे यह सब बिल्कुल भी सुना नही जा रहा था और यहां तक कि मुझे आँसू भी आने लग गए थे। उस दिन के बाद कुछ दिन तक मेरी भाभी से बिल्कुल भी बात नही हुई थी। फिर अचानक से ही एक दिन भाभी का मुझे फ़ोन आता है। मुझसे बिल्कुल भी रहा है नही जा रहा था इसलिए मैंने भाभी से पूछ लिया था कि “आपका किस बात पर अपने पति से झगड़ा हुआ था?

तब इस बात पर भाभी ने मुझे जवाब देते हुए कहा कि हमारी शादी को करीब एक साल हो गया है और अभी तक मैं प्रेग्नेंट नही हुई हूँ। मेरे पति मुझसे बच्चा चाहते है इस वजह से मुझसे अक्सर इस बात पर लड़ते रहते है। मेने डॉक्टर से चैक आप भी करवा लिया है लेकिन मुझ मे ऐसी कोई भी कमी नही है कि मैं किसी बच्चे को जन्म ही ना दे सकूँ। मुझे लगता है कि मेरे पति मैं कुछ कमी है लेकिन वे पुराने ख्यालात के है इसलिए कमी ना निकल जाए इस डर की वजह से अस्पताल ही नही जाते है।”

मैं यह सुनकर काफी हैरान था कि लोग बच्चे के चक्कर मे भी किसी औरत पर हाथ उठा सकते है। मैं उस दिन ठीक से सो ही नही पाया था और रात भर यही सोचता रहा कि आखिर ऐसा ही चलता रहा तो भाभी को उनके पति ऐसे मारते ही रहेंगे। एक दिन मेरे मन मे एक ख्याल आया और मेने भाभी को फ़ोन लगाकर कहा कि “आपको बस यहीं समस्या है ना कि आपको माँ बनना है?

हां – भाभी ने जवाब देते हुए कहा

तभी मेने भाभी से कहा कि “ अगर आपको कोई प्रॉब्लम ना हो तो मैं आपको माँ बना सकता हूँ”!! आपके पास यही एक रास्ता है।

भाभी ने पहले तो मुझे ऐसा करने से साफ मना कर दिया था। और मेरे ऐसा कहने पर उन्होंने मुझसे बात करना भी बंद कर दिया था। भाभी ने मेरी बातों के बारे में काफी कुछ सोचा ओर रोज-रोज के झगड़े से तंग आकर वो इस सब के लिए मान गयी थी। इसी बहाने मुझे भी भाभी को चौदने का मौका मिल गया था।

एक दिन मेने भाभी के साथ मिलकर एक प्लान बनाया था। भाभी का पति एक दम नशेड़ी था वो रोज़ाना रात के समय शराब पीकर घर आया करता था। एक दिन मेने भाभी को एक गहरी नींद की गोली दी ओर उनके पति को रात के समय दूध में मिला देने के लिये कहा। भाभी का पति उस दिन शराब पीकर आया था तो उसे जरा भी होश नही था। इसी दौरान भाभी ने उसे दूध में एक गोली देकर गहरी नींद में सुला दिया। इसके तुरंत बाद ही मैं भाभी के घर मे खिड़की के रास्ते से पहुंच गया था। मेने देखा कि भाभी का पति ज़मीन पर गहरी नींद में पड़ा हुआ है। मैं मुस्कुराता हुआ जैसे ही भाभी के पास गया, भाभी ने भी मुस्कुराते हुए अपना पल्लू अपनी छाती से नीचे गिरा दिया। इस नजारे को देखते ही मेरा लंड अपनी पूरी रफ्तार में खड़ा हो गया था।

गोली का असर केवल 3 घंटे ही रहने वाला था इसलिए मैं तुरंत भाभी के पास गया और उनके रसीले होंठो को चूमने लग गया था। मैं छाती पर उनके ब्लाऊज से ढके हुए बूब्स को भी उनके क्लीवेज वाले स्थान से चूमता जा रहा था। भाभी भी गहरी सांसे भरते हुए सिसकारियाँ लेती जा रही थी। उनके गले और उनके उत्तेजित अंगों को चूमकर में उन्हें चुदने के लिए मजबूर किये जा रहा था।

समय कम होने की वजह से मुझसे बिल्कुल भी इंतजार नही हो रहा था। मेने फिर भाभी को अपने दोनो हाथों से उठाया और फिर उन्हें बिस्तर की तरफ ले जाकर लेटा दिया था। अब मेने भाभी की साड़ी को उतार कर नीचे फेंक दिया था। वो केवल ब्लाउज ओर पेटीकोट में ही मेरे सामने लेटी हुई थी। मेने भी अपनी शर्ट को इस दौरान उतार कर फेंक दिया था। अब में भाभी के ऊपर चढ़कर उन्हें चूमता ही जा रहा था। साथ ही मेने उनका ब्लाउज भी चूमते हुए उतार दिया था। कुछ ही देर में मैने उनकी ब्रा को भी निकाल कर उनके बूब्स को बाहर निकाल दिया था। उनके गुलाबी बूब्स को देख कर तो मेरा लंड ओर भी ज्यादा फर्राटे मार रहा था।

भाभी उनके शरीर से स्पर्श होता हुआ मेरा लम्बा ओजार आसानी से महसूस कर सकती थी। मेने भाभी के बूब्स को चूमते हुए पीना शुरू कर दिया था। उनके बूब्स काफी ज्यादा नरम थे। उनके बूब्स को दबाने ओर चूसने से भाभी ओर भी ज्यादा उत्तेजित होती जा रही थी।

भाभी इस दौरान “ओह्ह हरीश आह आह मुझे बहुत अच्छा लग रहा है” ऐसा बोल कर मेरे कड़क लन्ड को ओर भी ज्यादा दावत दिये जा रही थी। मुझसे अब ओर ज्यादा इंतजार नही हो रहा था। मेने तुरंत ही अपने बड़े ओजार को अपनी पेंट से बाहर निकाल दिया था। भाभी तो मेरे ओजार को देख कर मानो घबरा ही गयी थी। ऐसा लग रहा था मानो उन्होंने पहली बार किसी का इतना लंबा ओजार देखा हो। मैं तुरंत ही अपने ओजार को भाभी के मुंह की तरफ़ ले गया था। भाभी समझ चुकी थी कि मैं उन्हें लंड मुंह मे लेने के लिए कह रहा हूं। भाभी को अभी ठीक से लंड मुंह मे लेते नही आ रहा था वो धीरे-धीरे बस टोपे तक ही मेरे लंड को चूसे जा रही थीं इसी दौरान मेने भाभी को मुंह पकड़ा और अपने लंड से भाभी के मुंह को चौदने लग गया था। मेने अपना पूरा लंड ही भाभी के मुंह मे उतार दिया था। भाभी भी मजे से अब मेरा लंड चूसे जा रही थी।

फिर मेने भाभी के पेटीकोट को उपर कर के उनकी पेंटी को नीचे घुटने तक उतार दिया था। अब मैं उनकी योनि के बीज को चाट रहा था। भाभी की उत्तेजना इस दौरान चरम सीमा तक जा पहुंची थी। उनके मुंह की आवाज की गुंजन मुझे ओर भी ज्यादा उत्साहित किये जा रही थी।

अब मेने भाभी की टांगों को उठाया ओर भाभी की चुद में टोपे तक ही अपना ओजार डालकर पहले उसे ठीक से सेट किया। और फिर एक ही झटके में अपना लंबा ओजार भाभी की चुद में उतार दिया था। भाभी की जोर से चीख निकल गयी थी। मैं उनकी चीख सुनकर डर ही गया था कि कहीं उनका पति उठा न जाये, लेकिन मुझे गोली पर पूरा भरोसा था। पहले में भाभी को धीमी रफ्तार में चोद रहा था। फिर भाभी की ओह्ह आह की दर्द होने वाली आवाज़ को सुनकर में उन्हें पूरी तेज रफ्तार से चौदने लग गया था। भाभी की आवाज़ पूरे कमरे तक गूँजने लग गयी थी। उस दिन मेने दो बार लागातर भाभी की चुद में अपना वीर्य ढोल दिया था। भाभी आज भी मेरी शुक्र गुजार है क्योंकि मेरी एक ही बार की चुदाई से वो प्रेग्नेंट हो गयी थी।

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