सुनीता की कामवासना

हेल्लो दोस्तों, कहानी की दुनिया मैं आपका बहुत-बहुत स्वागत है। आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुनाने वाले है जिसे सूनने के बाद आपका दिल खुश हो जाएगा। तो चलिए आज की रोमांचक सेक्स की कहानी की शुरुआत करते है।

यह कहानी है एक ऐसी चुद्दकड औरत की जिसे नए मर्दो को अपने जाल में फंसाकर उनसे चुदवाने का काफी ज्यादा शौक था। उस औरत का सुनीता था। सुनीता एक 33 वर्ष की औरत थी, लेकिन वह किसी 20 साल की जवान और खूबसूरत लड़की की तरह ही लगती थी। उसका बदन एकदम कटीला था। सुनीता दिखने में थोड़ी पतली और खूबसूरत लगती थी, लेकिन उसकी गांड ओर बूब्स काफी उभरे हुए नजर आते थी। सुनीता को पारदर्शी ओर अंगप्रदर्शन करने वाली साड़ियां पहनना काफी ज्यादा पसंद था। क्योंकि उसे हर समय नए मर्दो का फंसा कर उनसे चुदाई करनी होती थी। सुनीता की एक खास बात यह थी कि वह हर किसी को नही, बल्कि केवल उन्हीं मर्दो को फंसाती थी जो दिखने में काफी आकर्षक हुआ करते थे। सुनीता के पति एक बहुत बड़े बिजनेस मैन थे। सुनीता के पति साल भर में कुछ महीनों के लिए ही घर पर आया करते थे। यही वजह थी कि सुनीता ज्यादातर अकेली ही रहा करती थी।

पति के ना होने की वजह से सुनीता देर रात तक दूसरे मर्दों के साथ घुमा करती थी और उनके साथ पार्टी भी किया करती थी। सुनीता की एक बेटी भी थी, जिसका नाम पूजा था। पूजा अक्सर चुपके से अपनी माँ को रात को नए-नए मर्दो के साथ अपने घर पर देखती थी। पूजा ने अब तक कई मर्दों को उसकी माँ सुनीता के ऊपर चढ़ते हुए देख लिया था। इतनी चुदाई देख लेने के बाद आखिर पूजा भी उसी राह पर जाने लगे गयी थी। पूजा भी धीरे-धीरे अब उसकी माँ के तौर तरीके अपनाने लग गयी थी। खैर, सुनीता को अपनी बेटी से बिल्कुल भी प्यार नही थी, उसे बिल्कुल भी फर्क नही पड़ता था कि वो क्या करती है और क्या नही करती है। सुनीता बिल्कुल दूध जैसे सफेद शरीर की मालकिन थी, ओर काफी आकर्षक भी दिखती थी। सुनीता की कामवासना इतनी हद तक बढ़ चुकी थी कि इस वजह से वह अपनी बेटी पर भी बिल्कुल ध्यान नही दिया करती थी।

एक दिन पूजा के स्कूल से सुनीता को फोन आता है। फ़ोन पर प्रिंसिपल का चपरासी सुनिता को कहता है कि “आपको प्रिसिंपल ने स्कूल में बुलाया है आप कल शाम को स्कूल की छुट्टी के समय स्कूल में आ जाईयेगा”। अगले दिन ही प्रिंसिपल के कहे अनुसार, सुनीता स्कूल पहुंच जाती है। सुनीता उस दिन हॉट ब्लैक साड़ी ओर स्लीवलेस ब्लाउज पहन कर स्कूल आती है। ब्लाउज में से बाहर आ रहे सुनीता के हल्के से बूब्स काफी आकर्षक नजर आ रहे थे। सुनीता ने हिल वाली सेंडिल पहन रखी थी जिसमे वो थोड़ी लंबी और आकर्षक नजर आ रही थी। ऐसा लग रहा था कि सुनीता स्कूल में नही, बल्कि किसी पार्टी में आई हो। सुनीता की आंखों में हल्का सा काजल भी लगा हुआ था। उस समय जो भी उसकी आँखों मे देख लेता वो तो पूरी तरह से घायल ही हो जाने वाला था। सुनीता जैसे ही स्कूल के अंदर घुसती है तो चपरासी की तो उसे देखते ही आंखें फटी की फटी रह जाती है।

चपरासी का मुंह खुला का खुला ही रह जाता है और वो बस सुनीता को ऊपर से नीचे तक निहारने लगता है। इतने में ही सुनीता कहती है कि ‘क्या आप मुझे प्रिंसिपल के आँफिस तक ले जाकर छोड़ सकते हो? मेरा नाम सुनीता है और मैं पूजा की माँ हूँ। और प्रिंसिपल ने मुझे बुलाता था याद है ना?। तभी चपरासी कहता है कि “ चलिए मैं आपको प्रिंसिपल के रूम तक छोड़ आता हूँ। अब सुनीता आगे आगे चल रही थी और चपरासी उसके पीछे से उसे रास्ता बताए जा रहा था। इस दौरान चपरासी की नजर सुनीता की गांडों पर ही जा रही थी। सुनीता की गांडों को देख कर तो चपरासी की पेंट में एक लम्बा चौड़ा तम्बू ही तन गया था। कुछ देर बाद प्रिन्सिपल का रूम आता है और चपरासी सुनीता को रूम के बाहर तक ही छोड़ देता है। रूम के अंदर पूजा के स्कूल का प्रिंसिपल मेहरा बैठा हुआ था।

सुनीता ने जैसे ही मेहरा से अंदर आने की आज्ञा मांगी, तो मेहरा ने उसे तुरंत ही रूम में बुला लिया था।

सुनीता को देख कर मेहरा की तो आंखें ही फटी रह गयी थी। वह सुनिता को उपर से नीचे तक देखे ही जा रहा था। मेहरा, सुनीता की पारदर्शी साड़ी में से उसके बूब्स का जायजा लेने की कोशिश कर रहा था। सुनीता उसकी नजरो को पकड़ चुकी थी, लेकिन कही न कही सुनीता को भी अंगप्रदर्शन करवाने में काफी मजा आ रहा था। जब मेहरा सुनीता को देख रहा था, तभी सुनीता ने जान बूझकर अपना पल्लू नीचे गिरा दिया था। इसके बाद पल्लू को उठाते हुए सुनीता ने कहा “सर मैं पूजा की मां हूँ आपने मुझे बुलाया था? मेहरा ने पहले खुद को सम्भाल ओर कहा “हाँ मेने आपको बुलाया था। मेहरा काफी ज्यादा हैरान था क्योंकि उसको यकीन ही नही हो रहा था कि उसके सामने खड़ी जवान दिखने वाली अप्सरा एक लड़की की माँ है। यही वजह थी कि मेहरा ने सुनीता से पूछा कि ‘क्या आप सच में पूजा की माँ है आपको देख कर तो ऐसा लग रहा था जैसे आप उसकी बहन है”।

तभी सुनीता ने कहा “अरे नही मैं उसकी माँ हूँ, आप बताइए आपको क्या कहना था। मेहरा एक काफी समझदार इंसान था। वह सभी जगह खुद को अच्छे से कंट्रोल करना जानता था लेकिन सुनीता की खूबसूरती के सामने वो थोड़ा ढीला पड़ चुका था। मेहरा मन का काफी साफ और अच्छा इंसान था, इसलिए वह सुनीता कर सामने साधारण तरीके से पेश आने की कोशिश कर रहा था। लेकिन सुनीता भी उसके उकसाने में कोई कसर नही छोड़ रही थी और बार-बार झुक झुक उसे अपने बूब्स के दर्शन करवा रही थी। शायद मेहरा के तगड़े ओर आकर्षक शरीर की सुनीता भी काफी ज्यादा दीवानी हो चुकी थी। सुनीता ने फिर से बातों को आगे बढाते हुए कहा कि” बोलिये ना सर आप कुछ बता रहे थे? मेहरा, सुनीता के इरादों को पहचान गया था, लेकिन फिर भी मेहरा ने खुद को संभालते हुए कहा कि “देखिए आपकी बेटी पूजा पढ़ाई मैं काफी कमजोर है, मुझे लगता है कि आपको उस पर थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है”। तभी सुनीता थोड़ा और झुक कर अपने बूब्स के दर्शन करवाते हुए कहती है “वह पढ़ाई में कमजोर है इसलिए ही तो हम उसे स्कूल मैं भेजते है आप उस पर थोड़ा ध्यान दीजिए ना’।

इस बात पर मेहरा एक बार फिर खुद को संभालते हुए कहता है कि “देखिए हम तो उस पर पूरा ध्यान देते है लेकिन घर पर भी उसका ध्यान रखने की जरूरत है। पूजा अब पढ़ाई में काफी कमजोर हो रही है इसलिए अब हम उसे स्कूल से निकालने वाले है”। इतने में ही सुनीता, मेहरा के हाथों पर हांथ रखते हुए कहती है कि “सर प्लीज उसे स्कूल से निकालिये कोई दूसरा रास्ता भी तो हो सकता है ना”। मेहरा अब धीरे-धीरे सुनीता के इरादों को साफ साफ समझ चुका था, लेकिन मेहरा भी काफी समझदार था उसने फिर से संयम रखते हुए कहा कि ‘देखिए मेरे कहने का मतलब है कि “आपकी बेटी पढ़ाई में कमजोर इसलिये हो रही है क्योंकि वह गलत आचरण वाले लड़के और लड़कियों के साथ घूमने लगी है। आप यकीन नही करेगी कि आपकी बेटी देर रात तक लड़कों के साथ पार्टियों में जाने लगी है। सुनीता ने पहले मेहरा को बातों को अच्छे से सुना और एक बार फिर से मेहरा को अपने बूब्स के दृश्य करवाते हुए कहा कि “ इसमें गलत क्या है? मेरी बेटी थोड़ा मजा ही तो कर रही है ना, अब इसमें बुराई ही क्या है। सुनीता के मुंह से इतना सब कुछ सुनकर ओर उसकी हरकतों को देखने के बाद मेहरा समझ गया था कि पूजा के अंदर वो सभी लक्षण उसकी माँ के अंदर से आये है।

सुनीता के मुंह से इतना सबकुछ सुनने के बाद भी मेहरा ने एक दम शांत स्वभाव में कहा “देखिए सुनीता जी आप समझ नही रही है अगर आप की बेटी ने ये सब बंद नही किया तो उसकी पढ़ाई पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा और मजबूर होकर हमे उसे स्कूल से भी निकालना पड़ेगा।

यह सुनकर भी सुनीता के मन मे जरा भी डर नही था। वह तुरंत ही अपनी जगह से उठी और मेहरा के पीछे जाकर उसके कंधों पर मसाज करते हुए कहने लगी कि “सर आप मुझे काफी समझदार इंसान लगते है, आप थोड़ा समझने की कोशिश कीजिये अगर आप उसे स्कूल से निकाल देंगे तो उसका भविष्य पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा।”

सुनीता के इस तरह स्पर्श करने से मेहरा की पेंट में एक लंबा चौड़ा तम्बू तन गया था। इस तम्बू को सुनीता भी आसानी से देख सकती थी। लेकिन फिर भी मेहरा ने अपना सब्र नही खोया ओर शांत स्वभाव में कहने लगा कि “देखिए सुनीता जी अब मैं आपसे कुछ नही छुपाउंगा, मुझे यह खबर मिली है कि आपकी बेटी पूजा लोगों से गलत सम्बन्ध रखने लगी है और उसके इस गलत आचरण के बारे में मुझे बाकी छात्रों की तरफ से काफी शिकायत आ रही है इसलिए मुझे उसे कुछ दिनों के अंदर स्कूल से निकालना ही होगा”। एक तरफ सुनीता, मेहरा को अपने जाल में फंसा रही थी और दूसरी तरफ सुनीता को अपनी बेटी पूजा की भी उसी स्कूल में पढ़ाने की इच्छा थी ओर वह अपनी दोनों ही इच्छाओं को पूरा करना अच्छे से जानती थी। सुनीता एक बार जो ठान लेती थी वह उस काम को पूरा कर के ही छोड़ती थी। सुनीता ने एक बार फिर मेहरा के हांथों को अपने हांथों में पकड़ते हुए कहा कि “ऐसा मत कीजिये सर आप उसे स्कूल से मत निकालिये इसके बदले आप मुझे जैसा कहेंगे मैं बिल्कुल वैसा ही करूंगी”।

अब तक मेहरा का सब्र बिल्कुल टूट चुका था। मेहरा भले ही अपने आप को अच्छे से कंट्रोल कर सकता था, लेकिन उसका खून भी क़ाफी गर्म था। मेहरा ने अब बिना किसी बात की परवाह किये कहा “साली अब मैं सोचु की पूजा का आचरण अच्छा क्यों नही है। साली सुन तेरी बेटी एक नम्बर की रंडी है और उसमें उसकी कोई गलती नही है क्योंकि उसमें तेरे ही लक्षण है।” यह सुनकर सुनीता के मुंह मे हल्की से मुस्कान आ गयी थी। सुनीता ने मुस्कुराते हुए मेहरा से कहा कि “सर ये आपका गुस्सा कह रहा है”।

“मैं बिल्कुल भी गुस्सा नही हूँ क्योंकि मैं उसी वक्त सबकुछ समझ गया था, जब मैने तुझे पहली बार देखा था।” – मेहरा ने जवाब देते हुए कहा

मेहरा जानता था कि सुनीता एक नम्बर की चुददकड ओर बे-शर्म औरत है। काफी समय बीत चुका था और स्कूल के समाप्त होने का समय भी हो गया था, इसलिए सभी स्टाफ अपने घर पर जा चुके थे। वहीं अब मेहरा का भी सब्र टूट चुका था। मेहरा ने तुरंत ही अपने ऑफिस का दरवाज़ा बंद किया और फिर गुस्से में सुनीता की तरफ देखते हुए कहा “तू अपनी बेटी के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार है ना? चल आज मैं देखता हूँ कि तुझमे कितनी आग है”। बस इतना कहते ही मेहरा, सुनीता की तरफ बढ़ने लगा और इस दौरान सुनीता भी मेहरा को किसी चुदासी औरत की तरह देखकर मुस्कुरा रही थीं। मेहरा ने पहले तो सुनीता के बालों को खींचा ओर उसके मुंह को अपनी तरफ लाकर कहने लगा कि “तेरी जैसी बहुत सी औरतों की भूख को मैने शांत किया है अभी तू मुझे ठीक से जानती नही है।” इतना कहते ही मेहरा, सुनीता के होंठों को चूमने लग जाता है ओर इस दौरान सुनीता भी मेहरा के होंठों पर चुम्बन की बरसात करने लग जाती है।

सुनीता तो मेहरा पर इस तरह टूट पड़ती है कि वह कब से चुदने के लिए तरस रही हो। सुनीता की लिपिस्टिक के निशान मेहरा के चेहरे से लेकर पूरे शरीर पर छप गए थे। मेहरा भी चुदाई के मामले में कुछ कम नही था। मेहरा ने कुछ ही देर में सुनीता की साड़ी को पूरी तरह खोलकर उसके शरीर से अलग कर दिया था। सुनीता ने भी कुछ ही देर में मेहरा की पेंट को खोलकर उसके लन्ड को बाहर निकाल लिया था। मेहरा का लन्ड बहुत ही विशाल था, जिसे देखकर सुनीता के मुंह पर एक अलग ही चमक आ गयी थी। सुनीता की प्यासी औरत की तरह मेहरा के लन्ड को अपने गले तक चूसने लग गई थी। इस दौरान मेहरा सुनीता को टिप्पणी करते हुए कह रहा था कि “साली सुनीता ये तो मानना ही पड़ेगा कि तुझे लन्ड चूसना काफी अच्छे से आता है।” सुनीता हवस की बहुत भूखी थी, उसने मेहरा के लन्ड को अपने बूब्स के बीच मे लेकर मसलना भी शुरू कर दिया था। हैरानी की बात तो यह थी कि सुनीता ने मेहरा जैसे कड़क इंसान को भी पूरी तरह से पिघला कर रख दिया था।

मेहरा को सेक्स को लेकर देरी बिल्कुल भी पसंद नही थी। वह सुनीता के बूब्स को बिल्कुल आम की तरह दबा कर चूस रहा था। इस दौरान सुनीता की उत्तेजना भी काफी तेज होती जा रही थी, वह लागातर अपनी योनि के अंदर हाथ डालकर उसे मसले जा रही थी। कुछ ही देर बाद मेहरा ने सुनीता को टेबल पर लेटा दिया था। अब उसने सुनीता को पूरी तरह से नंगा कर के रख दिया था। अब मेहरा, सुनीता की योनि के अंदर जीभ डालकर उसे चाट रहा था। सुनीता के मुंह से बस यही आवाजें निकल रही थी कि “आह मेहरा आह तू तो बहुत कड़क है”। मेहरा ने कुछ ही देर के अंदर सुनीता की चुत को गीला कर के रख दिया था। सुनीता की गीली चुत को देख कर मेहरा का लन्ड ओर भी ज्यादा कड़क होता जा रहा था। मेहरा ने तुरंत ही अपने लंबे चौड़े लन्ड को तान कर खड़ा कर दिया और उसे ले जाकर सीधा सुनीता की योनि पर ले जाकर रख दिया था। पहले तो मेहरा ने टोपे तक ही सुनीता की गीली चुत में अपना लन्ड डाला और फिर अपने दूसरे झटके में अपने पूरे लन्ड को ही सुनीता की चुत में डाल दिया था।

सुनीता ने पहले भी काफी मर्दो से चुदवाया था, लेकिन मेहरा का लन्ड उसमें काफी लम्बा ओर मोटा था। मेहरा का लन्ड जैसे ही सुनीता की योनि को चीरता हुआ अंदर गया तो सुनीता की चीख ही बाहर आ गयी थी। सुनीता की चुत ने मेहरा के लोडे को एक दम जकड़ ही लिया था। इस दौरान पहले तो मेहरा ने सुनीता की टांगों को अपने कंधे पर रखा और फिर टेबल पर पड़ी हुई सुनीता की नंगी कमर को पकड़कर जोर-जोर से झटके देते हुए सुनीता को चौदने लगा। मेहरा का मोटा लन्ड सुनीता की चुत के लिए अभी भी काफी बड़ा था, इसलिए सुनीता जोर जोर से “आह आह आह आउच अम्म आह आह” करती हुई दर्द से चुदती ही जा रही थी। कुछ देर तक तो मेहरा सुनीता को ऐसे ही चोदता रहा और फिर उसके बाद मेहरा ने सुनीता को खड़ा कर के उसकी एक टांग को टेबल पर रखवाया ओर फिर उसकी योनि में अपना लन्ड डालकर पूरी रफ्तार से उसे चौदने लग गया था। सुनीता के मुंह से “आह आह ओह्ह” की आवाजें निकलना बंद ही नही हो रही थी। सुनीता मेहरा के उत्साह को बढ़ाने के लिए बार- बार उसे “ओर जोर से चोदो मेहरा ओर जोर से, मेरी चुत को फाड़ दो” कहते हुए उसका उत्साह बढ़ाती ही जा रही थी।

“रुक साली रंडी अभी तेरी भूख को शांत करता हूँ और हां तेरी बेटी भी ऐसे ही लोगों से चुदती रहती है” कहते हुए मेहरा ने सुनीता को टेबल के सहारे उल्टा खड़ा कर दिया था। हिल वाली सेंडिल में सुनीता ओर भी ज्यादा सेक्सी नजर आ रही थी। मेहरा ने बिना इंतजार किये पहले तो सुनीता की कमर को पकड़ा और फिर एक ही झटके में अपने लन्ड को सुनीता की चुत में डालकर उसे डॉगी स्टाइल पोजिशन में धड़ाधड़ चौदने लगा। मेहरा सुनीता की चुत को इतनी जोर से धक्का देते हुए चोद रहा था, जैसे वह आज ही उसके कुँए को खाई बना देगा। कुछ 2 घंटे तक तो मेहरा ऐसे ही सुनीता की चुत को चौदने लगा और फिर उसके बाद उसने सुनीता की योनि में अपना वीर्य ढोलकर सुनीता को अलविदा कर दिया था। पहली बार सुनीता को किसी मर्द ने इतने अच्छे से संतुष्ट किया था, इसलिए सुनीता काफी खुश थी। लेकिन मेहरा भी अपनी बातों का पक्का था उसने सुनीता के साथ चुदाई तो कि लेकिन उसकी बेटी को उसने स्कूल से निकाल दिया था। उस दिन के बाद मेहरा, सुनीता से फिर कभी नही मिला था ओर उस दिन के बाद से सुनीता भी किसी दूसरे मर्द की तलाश में लग गयी थी।

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