मेरी पुरानी गर्लफ्रेंड बनी दोस्त की पत्नी

नमस्कार दोस्तों, कैसे है आप सभी लोग आशा करता हूँ कि मजे कर रहे होंगे। मेरा नाम दीपक है और अभी मेरी उम्र महज 25 साल है। मेने अपना कॉलेज पूरा कर लिया है और अब मैं एक मीडिया कम्पनी में पत्रकारिता की जॉब करता हूँ। पत्रकारिता के साथ ही मुझे फोटोज़ खींचना ओर मॉडलिंग करना काफी अच्छा लगता है। यह मेरी ख़ुशनसीबी है कि मेरा कद काफी लम्बा है साथ ही मैं दिखने में भी काफी आकर्षक लगता हूँ। मैं कभी खुद की तारीफ नही करता लेकिन यह बात मैं दावे से कह सकता हूँ कि एक बार अगर मुझे कोई लड़की देख ले तो वह पूरी तरह से मेरी दीवानी ही हो जाती है। वैसे मेरे कुछ ज्यादा शौक नही है। मुझे केवल जिम जाना ओर नयी-नयी लड़कियों से दोस्ती रखना काफी ज्यादा पसंद है। मैं स्कूल के समय से ही लड़कियों को अपनी तरफ आकर्षित करना जानता हूँ और अभी तक मैं बहुत सी लड़कियों के साथ शारीरिक संबंध बना चुका हूं। वैसे तो मैं जहां भी जाता हूँ वहां पर कोई ना कोई लड़की सेट कर लेता हूँ और अपनी कम्पनी के अंदर भी काफी लड़कियों को चोद चुका हूं। लेकिन अब मैं काफी बोर हो गया हूँ अपनी कम्पनी की लड़कियों के साथ ओर जॉब की वजह से बाहर की लड़कियों के साथ भी सेटिंग करने का अब मुझे कोई मौका ही नही मिल पाता है लेकिन यह बात भी मैं दावे से कह सकता हूँ कि अगर मुझे किसी लड़की को चौदने का मौका मिलता है तो मैं उस मौके को छोड़ता नही हूँ। लेकिन एक दिन मुझे एक लड़की की चौदने का मौका मिल ही गया था और उस लड़की की शादी भी कुछ महीनों पहले ही हुई थी।

आज मैं आपको अपनी सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसमे आपको मैं ये बताऊंगा की कैसे मेने एक नई शादी शुदा लड़की की जबरदस्त चुदाई की थी। तो बात आज से करीब 2 साल पहले की है जब पहली बार ऐसा हुआ था कि मैं अपनी पत्रकारिता की जॉब से काफी ज्यादा निराश हो गया था। क्योंकि इसी जॉब की वजह से करीब 2 महीनों से मैं किसी लड़की के साथ कोई शारीरिक संबंध नही बना पाया था। लेकिन कम्पनी में ही मेरे कुछ अच्छे दोस्त भी बन गए थे, जो की हर काम में मेरा साथ दे दिया करते थे। कम्पनी के अंदर ही एक लड़का विवेक जो कि मेरा काफी अच्छा दोस्त बन चुका था। वह एक दिन बहुत ज्यादा खुश होकर मेरे सामने आता है और मेरे हाथों मैं एक पत्रिका थमाते हुए कहता है “भाई दीपक मेने एक लड़की पसंद कर ली है और मैं बहुत ही जल्द उस लड़की से शादी करने वाला हूँ और मैं चाहता हूं कि तू पूरी फैमिली के साथ मेरी शादी में जरूर आये।”

“हां भाई जरूर कैसी बात कर रहा है तेरी शादी हो और मैं ना आऊ भला ऐसा भी हो सकता है क्या?” – मेने खुशी जाहिर करते हुए कहा

कुछ ही दिनों बाद विवेक की शादी थी।विवेक की शादी पर कम्पनी का पूरा स्टाफ गया हुआ था लेकिन किसी वजह से मैं उसकी शादी मैं नही जा पाया और इसके लिए मेने विवेक से माफी भी मांग ली थी। मेने उस दिन विवेक को फ़ोन पर कहा “भाई क्या हुआ अगर मैं तेरी शादी में नही आ पाया तो? मैं किसी ओर दिन भाभी से मिल लूंगा”। मैं काम की वजह से शहर से बाहर गया हुआ था और यही वजह थी कि मैं अपने दोस्त विवेक की शादी में नही जा पाया था। लेकिन 4 ही दिनों के अंदर मैं अपने सभी कामों को निपटा कर फिर से शहर में आ गया था। वापस लौटने के बाद ही मेने सबसे पहले तो विवेक से मुलाकात की ओर विवेक से भाभी को मुझसे मिलवाने की इच्छा जाहिर की। मजरे शादी में ना आने की वजह स विवेक मुझसे थोड़ा सा नाराज था लेकिन मुझसे मिलते ही उसकी नाराजगी पल भर में खुशी में बदल गयी थी।

विवेक ने एक छुट्टी का वाला दिन देखा और मुझे उसकी वाइफ से मिलवाने के लिए रविवार के दिन मुझे अपने घर खाने पर बुला लिया था। मैं आने दोस्त विवेक के कहे मुताबिक में उससे ओर उसकी पत्नी से मिलने के लिए उसके घर पर पहुंच चुका था। मैं जैसे ही विवेक के घर पहुंचता हूँ, वह मेरा बहुत ही अच्छे से स्वागत करता है। सब तक विवेक की पत्नी किसी दूसरे कमरे में मौजूद होती है और मेरे घर पहुंचते ही विवेक सबसे पहले अपनी पत्नी को चाय बनाकर लाने के लिए कहता है। कुछ ही देर विवेक की पत्नी चाय लेकर कमरे में पहुंचती है और जैसे ही मैं उसकी पत्नी को देखता हूँ मेरी आँखें तो फटी की फटी ही रह जाती है। मुझे अपनी आंखों पर बिल्कुल भी यकीन ही नही हो रहा था, क्योकि जो विवेक की पत्नी थी वो तो कुछ 2 साल पहले मेरी गर्लफ्रेंड थी। विवेक ने जिस लड़की से शादी की थी, उसका नाम सलोनी था, जो को मेरी पुरानी गर्लफ्रेंड रह चुकी थी।

सलोनी एक आकर्षक शरीर की मालकिन थी। वह दिखने में बिल्कुल स्लीम लगती थी, ओर उसका कद काफी लंबा था। सलोनी किसी हीरोइन की तरह लगती थी। जब वह ठुमक-ठुमक कर चलती थी, तो मेरी नजर तो उसकी गांडों पर ही ठहर जाती थी। सलोनी की विवेक से शादी होने से पहले में काफी बार सलोनी के साथ सेक्स कर चुका था, लेकिन शादी के बाद तो सलोनी ओर भी ज्यादा हॉट दिखने लगे गयी थी, ओर ये तो होना भी था, क्योकि नई शादी शुदा औरत काफी सेक्सी लगती है। जैसे ही सलोनी ने मेरे हाथों में चाय का कप दिया हम-दोनों की नजर बस एक दूसरे को ही देख रही थी। साथ ही सलोनी की पतली इर लाजवाब कमर भी मेरी नजरों से हटने का नाम ही नही ले रही थी। पहले तो विवेक ने मुझे उसकी पत्नी सलोनी से मिलवाया ओर फिर सलोनी वहां से जा चुकी थी। कुछ देर बाद में भी विवेक के घर से जा चुका था, लेकिन सलोनी का जो आकर्षक शरीर था। उसकी परछाई पूरी तरह से मेरी आँखों मे छप चुकी थी। मैं सिर्फ यही सोच रहा था कि काश एक बार फिर मुझे सलोनी को चौदने का मौका मिल जाता तो बिल्कुल मजा ही आ जाता, लेकिन मैं यह भी जानता था कि ऐसा होना अब लगभग नामुमकिन है।

उस दिन के बाद से कुछ-कुछ दिनों में ऐसे विवेक से मिलने के लिए आ जाया करता था, जिससे कि मुझे सलोनी के दर्शन हो जाये। लेकिन काफी दिन बीत जाने के बाद भी मुझे कोई फायदा नही मिल रहा था। मैं लगभग सलोनी को पटाने की उम्मीद अपने दिल से निकाल ही चुका था। एक दिन तो चमत्कार ही हो गया था। मैं रात मैं अपनी छत पर बैठा हुआ था, तभी अचानक से सलोनी का मुझे मेरे व्हाट्सएप पर मैसेज आता है। मैं आप सबको बता नही सकता, लेकिन उस दिन मेरी खुशी का तो कोई ठिकाना ही नही रह गया था। जैसे ही मेने सलोनी से पूछा कि उसे मेरा नम्बर कहा से मिला तब उसने मुझे बताया कि उसने विवेक के मोबाइल से मेरा नम्बर निकाल लिया था। मैं उस दिन इतना खुश था कि मैं यह बात तो उससे पूछना ही भूल गया कि आखिर उसने मुझसे बात करने की कोशिश क्यूँ की थी? यकीनन वो मुझसे कुछ छीपा रही थी, लेकिन वो मुझसे क्या छीपा रही थी इस बारे में मैने जानने की कोशिश ही नही की थी। पहले तो मैने सलोनी से उन दिनों की बातें की जब वह मेरी गर्लफ़्रेंड हुआ करती थी।

बातों ही बातों मेने यह भी पूछ ही लिया कि” ओर बताओं शादी के बाद तुम्हारी जिंदगी कैसी चल रही है??

कुछ दिनों तक उसने अपने वैवाहिक जीवन के बारे में कुछ नही बताया, लेकिन फिर भी उसके बातें करने के तरीकों से में समझ चुका था कि जरूर उसे कुछ ना कुछ समस्या जरूर है। एक दिन ऐसे ही बातों ही बातों में आखिरकार, परेशानी होकर उसने मुझे बता ही दिया कि वह अपने वैवाहिक जीवन से बिल्कुल भी खुद नही है। सलोनी ने मुझे बताया कि उसका पति यानी कि मेरा दोस्त विवेक उसे ठीक तरह से शारीरिक सुख नही दे पाता है जिस वजह से वह अक्सर परेशान रहती है और कभी अगर उनका सेक्स करने का मन भी करता है तो उसका पति जल्दी से ठंडा पड़ जाता था। सलोनी की समस्या यह थी कि उसका पति इस बात को ज्यादा गंभीरता से नही लेना चाहता था ओर नाही इस विषय मे कभी किसी चिकित्सक से मिलना चाहता था। अब तक मैं यह समझ चुका था कि सलोनी अपनी सेक्स इच्छा की मजबूरी के चलते मुझसे नजदीकियां बढ़ाये जा रही है, लेकिन मुझे अभी भी उसे सेक्स के लिए राजी करने का कोई अच्छा मौका नही मिल पा रहा था।

मुझे सलोनी के साथ सेक्स करने की इतनी जल्दी नही थी, लेकिन मैं उसे चौदने के लिए एक अच्छे मौके की तलाश जरूर कर रहा था। एक दिन मेने अपने ऑफिस की छुट्टी लेकर बातों ही बातों में सलोनी को मेरे साथ घूमने चलने के लिए मना लिया था। उस दिन सलोनी लाल रंग की साड़ी पहन कर आई थी। उसके ब्लाउज में से जो उपर की तरफ उसके बूब्स की जो हल्की झलक दिख रही थी वह मेरी कामुकता को ओर भी ज्यादा बढ़ाये जा रही थी। सलोनी उस दिन लिपिस्टिक ओर आंखों में काजल लगा कर आई थी। वह इतनी खूबसूरत दिख रही थी कि मन कर रहा था कि उसे वहीं पर दबोच लूं। उस दिन हम पार्क में घूमने के लिए गए हुए थे। हम दोनों पार्क में बैठते हुए एक दूसरे से अकेले में बातें कर रहे थे, इस इस दौरान हम दोनो एक दूसरे के ख्यालों में इतना आँखों चुके थी कि हम दोनों एक दूसरे के ऊपर से अपनी नजर ही नही हटा पा रहे थे।

सलोनी की मीठी बातें ओर होंठो पर लिपिस्टिक देखकर पता नही क्यों मैं अपने आप को रोक ही नही पा रहा था, ओर मेने उसी वक्त धीरे से आगे बढ़कर सलोनी के होंठ पर चुम लिया था। मेरे इस तरह से चूमने पर सलोनी को बिल्कुल भी बुरा नही लगा था, लेकिन वह कुछ देर के लिये शांत जरूर हो गयी थी। इससे पहले की सलोनी मुझसे कुछ कहती अचानक से वहां पर तेज बारिश होने लग गयी थी। बारिश से बचने के लिए सलोनी ओर मैं भागते हुए एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए थे। बारिश इतनी तेज थी कि पेड़ के नीचे पहुंचने से पहले ही हम काफी हद तक भीग चुके थे। इस दौरान जैसे ही मेने सलोनी की तरफ देखा तो मैने पाया कि भीगे हुए शरीर मे उसके अंग ओर भी ज्यादा उभरे हुए दिखाई दे रहे थे। हवा की वजह से कुछ देर के लिए उसका पल्लू खिसक गया था। पानी की बूंदे उसके स्तन की ढलान से होकर अंदर जा रही थी। इस दृश्य को देखने भर से मेरी पेंट में एक लम्बा चौड़ा तम्बू तन कर खड़ा हो गया था। कुछ देर बाद जब बारिश कम हो गयी तो मैने सलोनी अपने साथ मेरे घर पर चलने के लिए कहा ओर क्योंकि मैं आने फ्लेट पर अकेला ही रहता था, तो सलोनी मेरे साथ चलने के लिए काफी सोच रही थी लेकिन कुछ देर बाद ही उसने मेरे साथ चलने के लिए हां कह दी थी।

जैसे ही हम भीगते हुए मेरे फ्लेट पर घर पहुंचे तो हम दोनों की कामुकता भी तेजी से बढ़ती ही जा रही थी। पहले तो हम दोनों ने एक-दूसरे को देखा ओर फिर दौड़ कर हम दौनो ने एक दूसरे के पास जाकर एक दूसरे को चूमना शुरू कर दिया था। इस दौरान सलोनी की साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया था और मैं उसके ब्लाउज के ऊपर से ही उसके बूब्स को चूमता चला जा रहा था। मैं सलोनी के कान के नीचे ओर गालों पर चूमते हुए उसे ओर भी ज्यादा उत्तजित किये जा रहा था। कुछ देर बाद ऐसे ही खिसकते हुए सलोनी दीवार के सहारे उलटी खडी हो गयी थी ओर मैं पीछे से उसके गालों को चूम रहा था। इस दौरान सलोनी के मुंह से तेज सिसकारियां निकले जा रही थी। चूमते हुए मेने पीछे से ही सलोनी के ब्लाउज को खोलकर उसके जिस्म से अलग कर दिया था। अब मैं पीछे से उसे दीवार की तरफ धकेलते हुए उसकी कमर को चूमता ही जा रहा था। पहले तो मैने सलोनी की पूरी साड़ी को खोलकर उसके जिस्म से अलग किया फिर अपनी शर्त को खोलते हुए फिर से सलोनी की तरफ बढ़ने लगा। मेने फुर से सलोनी के होंठ पर होंठ रखकर उसे चूमना शुर कर दिया और इस दौरान वह कसकर मेरे शरीर को जकड़कर मेरी पीठ पर अपना हाथ फेरें जा रही थी।

मेने तुरंत ही सलोनी को अपने हाथों से उठाया और फिर उसे ले जाकर बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया था। अब मेने सलोनी को चूमते हुए उसके पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी योनि पर हाथ फेरना शुरू कर दिया था। मैं उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी योनि को मसले जा रहा था। अब तक सलोनी भी काफी उत्तेजित हो चुकी थी। उसने पहले तो मुझे बिस्तर पर सीधा लेटा दिया और फिर मेरी पेंट को खोलकर कर मुझे पूरी तरह से नँगा कर दिया था। सलोनी मेरे सामने केवल अपने ब्रा ओर पेटीकोट में थी और उसने कुछ ही देर में मुझे अपनी चरम सीमा पर पहुंचा दिया था। उसने पहले तो प्यार से मेरे टट्टे को चूमा ओर फिर एक ही झटके में मेरे पूरे लंड को ही अपने मुंह मे निगल लिया था। वो मेरे पूरे लन्ड को अपने मुंह में उतार कर उसे चूस रही थी, जिस कारण मैं अपना होश ही पूरी तरह से खो चुका था। मुझे इतना मजा पहले कभी नही आया था। सलोनी मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी, जैसे उसने पहली बार किसी का इतना लंबा और मोटा लन्ड अपने मुंह मे लिया हो।

कुछ देर तक तो वह ऐसे ही मेरे लन्ड को चुस्ती रही और फिर वह अचानक से मेरे लन्ड पर आकर बैठ गयी थी। वह ऐसे ही मेरे ऊपर बैठकर अपनी पेंटी को मेरे लिंग पर रगड़ कर मुझे अपनी उभरती हुई चुत का स्पर्श करवा रही थी। उसके इस तरह से से मेरा लंड काफी ज्यादा तन चुका था और उसे चौदने के लिए बिल्कुल पागल ही होता जा रहा था। रगड़ खाते हुए मैं उसकी नर्म चुत को आसानी से महसूस कर सकता था। इस दौरान मेरे मुंह से बस “आह ओह्ह सलोनी मजा आ गया” बस ऐसी ही आवाजें निकले जा रही थी। कुछ देर बाद मेने सलोनी को फिर से बिस्तर की तरफ लेटा दिया था। अब मेने उसके स्तन को भी उसकी ब्रा से आजाद कर दिया था। सलोनी के निप्पल गुलाबी ओर बड़े बड़े थे। मैं उसके निप्पल को चूसने से खुद को रोक नही पा रहा था। मैं जोर-जोर से सलोनी के बूब्स को मसलते हुए उसे लगातार चूसते जा रहा था। कुछ देर बाद मेने सलोनी के पेटीकोट के नीचे से उसकी पेंट को निकालकर अलग कर दिया था। मैं अब ओर इंतजार नही कर सकता था, इसलिए मैंने बिना देरी किये सलोनी के पेटीकोट को उपर कर के अपने कड़क ओजार को सलोनी की चूत में उतार दिया था। अब मैं धड़ाधड़ झटके देते हुए सलोनी को चोद रहा था और वह मस्त “आह आह” की आवाजें निकालते हुए मस्ती में चुदते ही जा रही थी। कुछ ही देर बाद मेने उसके पेटीकोट को भी उतार कर उसे पूरा नँगा कर दिया था ओर फिर उसे घोड़ी बनाकर उसकी कमर पकड़ते हुए पूरे दम से मेने अपना लन्ड उसकी चुत में उतार दिया था। सलोनी को चुदने में काफी मजा रहा था। उसकी चीख की आवाज पूरे कमरे में आ गई थी। उस दिन मेने सलोनी को एक घण्टे तक अलग-अलग अंदाज में चोदा था। यहां तक कि मेंने उसके साथ गांड चुदाई भी की थी। अब उसका जब भी चुदने का मन करता था, तो वह मेरे पास आ जाती थी।

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