दोस्त की सास की जमकर ठुकाई की

हेलो दोस्तों, कैसे हो सब? बारिश का मौसन आ चूका है और चुदाई के ज़्यादा मज़े लेने का वक़्त है। आज कल लड़कियों की चुत में उतना मज़ा नहीं है जितना आंटियों की चुत में है। दोस्तों चलो आज एक कहानी सुनाता हु आपको।  

मेरा नाम राज है और अब तक तो मैंने काफी लड़कियां और आंटियों की चुत पर राज कर रहा हु। सेक्स के मामले में मेरा नसीब बहुत ही अच्छा रहा है। मैं रहता दिल्ली में हु जहां हर औरत और लड़की नए नए लंड की प्यासी है। मैं वहां एक कंपनी में काम करता हु और खूबसूरत और चूड़ासी लड़कियों और आंटियों को अपना लंड पिलाता हु। अच्छे खासे पैसे बन जाते है इस काम से।  

कहानी शुरू होती है जब मेरे एक ख़ास दोस्त की शादी दिल्ली की लड़की से हुई थी।  लेकिन मेरे दोस्त की सास तो सास कहलवाने के लायक नही।  उसकी सास का नाम रचना था।  उम्र काम से काम ४६ और उनका शरीर पूरा भरा हुआ था।  दिखने में काफी खूबसूरत और उनके बड़े बड़े रसीले आम काम से काम ३८ इंच के होंगे। मैं आज से ६ महीने पहले दोस्त के साथ उसकी ससुराल में गया था। हम सबने खाना खाया और मेरा दोस्त और उसकी बीवी को पड़ोस वाले घर गए थे मिलने। 

मेरे दोस्त ने कहा ”तू यहाँ आराम कर। हम लोग आते है”

अब इन् दोनों के साथ उनकी छोटी बेटी पूजा भी साथ में चली गयी। थोड़ी देर में मैं लेट गया और फ़ोन चला रहा थ। 

इतने में ही रचना ने कहा ”पूजा, मेरे कमरे में आना”

अब मैंने सुनकर कुछ नहीं कह।  फिर दूसरी बार आवाज आयी, अब मैं ऊपर के कमरे में गय। रचना सिर्फ पेटीकोट और ब्रा में थी। ब्रा के हुक नहीं लग रहे थे । दोस्तों क्या नज़ारा होगा, एक औरत जिसका भरा और गोरा शरीर। पीछे से कमर कितनी गज़ब की।  दोस्तों मैं नज़ारा शब्दों में बया नहीं कर सकता। मैं धीरे से पीछे गया और ब्रा के हुक लगा दिया।  मैं हुक लगाकर जल्दी से जाने लगा। 

इतने में रचना ने कहा ”रुको” जल्दी से रचना ने अपना शरीर पल्लू से लपेट लिया

रचना ने कहा ”पूजा कहा है?”

मैंने धीरे से कहा ”वो भी उनके साथ पड़ोस वाले घर में चली गयी”

यह कहकर मैं नीचे आ गया। अब ऐसा नज़ारा देखकर मेरा लंड बिलकुल ही उठ गया।  मैंने चुपके से हिलाकर अपने लंड को शान्ति दिया। 

मैं उसी नज़ारे को सोचकर खुस मैं ही मैं खुश हो रहा था। 

कुछ पल बाद फिर से आवाज आयी ”राज ज़रा ऊपर आना”

मैंने सोचा अब क्या हुआ, मैं ऊपर चले गया। रचना ने कहा मुझे अलमारी से कुछ निकलवाना है। मैंने सामन निकलना शुरू किया, ऊपर से उनके बड़े बड़े आम साफी दिख रहे थे।  उधर मेरा ८ इंच का लम्बा लंड शांत नहीं हो पा रहा था।  गलती से रचना की नज़र मेरे खड़े हुए लंड की तरफ गयी।  उन्होंने तुरंत सामन को पकड़ते वक़्त पल्लू निचे गिरा दिया। अब तो मैं उनके बड़े बड़े स्तन देखकर रह नहीं पाया।  इसी चक्कर में मेरा बैलेंस बिगड़ गया और मैं नीचे गिर गया।  असल में मैं रचना के पैरों के ऊपर गिर गया। 

रचना ने ज़ोर से कहा ”हाय, दर्द हो रहा है”

मैंने तुरंत उन्हें उठाया अब तो मेरा एक हाथ उनकी कमर पर था और उनकी चूचियां साफ़ दिख रही थी।  मैंने तुरंत उनको बेड पर सुला दिया और बिना रुके किस करने लग गया।  शुरू में तोह रचना ने कुछ दिलचसभि नहीं दिखायी। फिर तो मैंने उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से किस करने लगी। अब तो हम दोनों काफी वक़्त से एक दूसरे को किस कर रहे थे।  अब तो मुझे उनकी चूचियों को दबाना था।  मैंने उनके ब्लाउज को खोल दिया और मस्त चूचियां दबाने लगा। धीरे धीरे रचना जोश में आ गयी।  कुछ देर बाद उन्होंने कहा ”अब रहा नहीं जा रहा, मेरी चुत में अपने लंड का स्वागत करो”

मैंने कहा ”अभी मज़ा नहीं आएगा, थोड़ा रुक जाइये”

रचना बोली ”तुमसे कुछ नहीं होगा, मुझे अपना लंड चुसो”

तुरंत उन्होंने मेरा लंड अपने हाथ में लिया और ज़ोर ज़ोर से हिला हिलाकर चूसने लगी। मुझे लगता है उन्होंने काफी महीनो के बाद लंड चूस रही है।  यहाँ तक की वो मेरे पुरे बदन पर किस कर रही थी।  थोड़ी देर में मैंने अपना सारा लंड का रास रचना के मुँह में गिरा दिया। वो तो   मुस्कुराते हुए सारा रस पी गयी। कुछ पल बाद वो मेरे बगल में उलटे होकर लेट गयी। उनके बदन पर सिर्फ पेटीकोट था और कुछ भी नहीं।  मैं उनकी कमर और पीट पर किस कर रहा था।  रचना भी सिसकियाँ भर रही थी। उससे भी काफी मज़ा आ रहा था।  मैंने रचना को अपने बाहों में भर लिया और अपना लंड उनके बदन से रगड़ रहा था।  मैं रचना के दोनों चूचियों को दबा रहा था और साथ में लंड भी रगड़ रहा था।  वो अपने एक हाथ से मेरे लंड को आंध को सेहला रही थी। अब तो मुझसे सच्ची में रुका नहीं जा रहा था।  

रचना ने कहा ”अब अपने इस लंड को मेरी चुत में घुसा दो। मैं बहुत प्यासी हु। 

मैंने सोचा अब यह सही वक़्त है।  मुझसे भी रहा नहीं जा रहा चुदाई के बिना।  मैंने उनकी चुत पर हलकी सी किस की और अपने लंड को रगड़ने लगा। चुत को देखकर अंदाजा लग रहा था की यह औरत कितनी प्यासी है।  मैंने एक ज़ोर का धक्का लगाया और रचना ज़ोर से चिलायी ”अह्ह्ह्हह” ”ुह्ह्हह्ह”

रचना ने धीरे से कहा ”थोड़ा आराम से करो, बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है ”

मैंने कहा ”अब यह लंड नहीं रुकेगा”

मैंने फिर फिर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाया।  जितना रचन चिल्लाती थी उतना ही मैं जोश में आता था।  थोड़े वक़्त बाद रचना को भी मज़ा आ रहा था। मैं भी रचना की दोनों चूचियों को मस्त दबा रहा था। 

रचना कहती रही ”ऐसी ठुकाई तो मेरी किसीने भी नहीं की”

कुछ ही देर में रचना झड़ गयी।  लेकिन मैं कहा रुकने वाला था।  रचना मेरे सामने घोड़ी बन गयी और मैंने पीछे से अपने लंड को घुसाया।  

रचना उछाल उछाल के अपनी गांड को मुझसे चुदवा रही थी। अब तो मैंने झड़ने वाला था। मैंने उनको सीधा लेता दिया और सारा लंड का रस उनके मुँह और चूचियों पर गिरा दिया।  रचना भी मज़े से सारा रस फिरसे पी गयी।  अब तो हम एक दूसरे से लिपट कर किस करने लगे।  

अब तो हमारी बातें रोज़ होती है फ़ोन पर।  उन्होंने तो अपनी और ३-४ सहेलियों को मुझसे चुदवाया है।