कम्पनी के बॉस से की जमकर चुदाई

नमस्कार मित्रों कहानी की इस दुनिया मे आपका बहुत बहुत स्वागत है। मेरा नाम कविता है और आज मैं आपको मेरी एक सच्ची सेक्स स्टोरी इस जगह के माध्यम से बताने जा रही हूं। कहानी को शुरू करने से पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बता देना चाहती हूं। मेरी उम्र अभी 24 साल है और मैं अभी न्यूज़ एंकर की जॉब करती हूं। मैं दिखने में काफी खूबसूरत गोल-मटोल चेहरे वाली एक मस्त आइटम हूँ। मुझे जिम जाने का बहुत शौक है और मैने जिम कर के अपने शरीर को काफी आकर्षक बना लिया है। मैं दिखने में पतली हूँ लेकिन मेरे बूब्स ओर गांड वाकई में काफी लाजवाब है। तो चलिए अब मैं अपनी कहानी को शुरू करती हूँ।

बात आज से करीब 3 साल पहले की है जब मेने अपनी पढ़ाई को पूरा कर लिया था और फिर मैं एक अच्छी जॉब की तलाश कर रही थी। मुझे काफी समय से कोई भी ढंग की जॉब नही मिल पा रही थी, इसलिए मैं काफी परेशान रहने लग गयी थी। कुछ समय बाद मेरे ब्वॉयफ़्रेंड जिससे मैं सच्चा प्यार करती थी, उसने मुझे एक कम्पनी के बारे में बताया था। वह कम्पनी हमारे शहर में बिल्कुल नयी थी, इसलिए मुझे उस कम्पनी के बारे में कुछ खास ज्यादा जानकारी नहीं थी। लेकिन मुझे किसी भी तरह एक जॉब चाहिए थी, इसलिए बिना कुछ सोचे समझे मैं उस कम्पनी में काम करना के लिए अप्लाई करने चली गयी थी। मेरी योग्यता देखने के बाद उस कम्पनी ने मुझे जॉब पर रख लिया था।

वह एक कोल्डड्रिंक बनाने वाली कम्पनी थी। भले ही यह काम मेरी पढ़ाई से थोड़ा अलग था लेकिन मुझे खुशी थी कि मुझे कुछ समय के लिए एक अच्छी जॉब मिल गयी थी। मेने कम्पनी में काफी मन लगाकर काम किया और मैने उस कम्पनी को आगे ले जाने के लिए वह सबकुछ किया जो मैं कर सकती थी। मैं काफी खूबसूरत थी, इसलिए मेरी कम्पनी में काफी चर्चा रहती थी। मुझे कम्पनी में रह कर काम करते हुए करीब 6 महीने बीत चुके थे, लेकिन एक दिन मेरे साथ एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने मेरी जिंदगी को पूरी तरह से बदल कर ही रख दिया था। एक दिन कंपनी के मालिक प्रदीप सिंह की नजर मुझ पर पड़ी और वह उसी वक्त मेरी खूबसूरती का दीवाना हो गया था। उस दिन के बाद से प्रदीप हमेशा मुझे छूने ओर बात करने का कोई ना कोई बहाना ढूंढ़ा करता था। कम्पनी के मालिक होने की वजह से मेरी उससे थोड़ी बातचीत भी होने लग गयी थी। अब प्रदीप ही मुझे कम्पनी के बाद घर छोड़ने के लिए जाया करता था।

धीरे- धीरे प्रदीप ओर मेरे बीच बातें ओर नजदीकियां बढ़ने लगी थी। प्रदीप दिखने में काफी खूबसूरत और पैसे वाले था। मैं ना चाहकर भी प्रदीप की तरफ खिंची चली जा रही थी। मेरे ब्वॉयफ़्रेंड ने मेरे लिए बहुत कुछ किया था लेकिन फिर भी प्रदीप के साथ रहकर में अपने बॉयफ्रेंड को धोखा दिए जा रही थी। कुछ दिनों में ही प्रदीप ने मेरा जॉब प्रमोशन भी कर दिया था। अब मुझे इस जॉब मैं इतना पैसा मिल रहा था, जो मुझे किसी भी जॉब में नही मिल सकता था। यही वजह थी कि अब मैं जॉब को बिल्कुल भी नही छोड़ना चाहती थी। कुछ दिनों बाद का जन्मदिन था ओर उसने मुझसे कहा कि “वह उसका जन्मदिन सिर्फ मेरे साथ अकेले बनाना चाहता है”। मैं काफी समय से प्रदीप के साथ थी और अब मैं समझ चुकी थी कि प्रदीप अब हमारी दोस्ती को थोड़ा और आगे तक ले जाना चाहता है। देखते ही देखते प्रदीप का बर्थ डे का दिन नज़दीक आ गया था। मैं उसके बर्थडे के दिन एक हॉट लाल कलर की ड्रेस पहन कर उससे मिलने के लिए गयी हुई थी।

प्रदीप के बर्थडे पर हम दोनों ने पहले मूवी देखी और फिर एक बड़े होटल पर हम दोनों खाना खाने गए थे, साथ ही हमने बियर बार में एक-दूसरे के साथ बहुत डांस किया था। इसके बाद हम दोनों थक तक कर प्रदीप के फ्लैट पर चले गए थे, जहां पर प्रदीप अकेला ही रहा करता था। प्रदीप के फ्लैट मैं पहुँचकर पहले तो हमने जम कर शराब पी ओर फिर साथ मैं थोड़ी मज़ाक मस्तियाँ करने लग गए थे। इस दौरान मैं काफी ज्यादा नशे में धुत्त हो चुकी थी। इससे पहले की मैं कुछ समझने के काबिल होती की प्रदीप मेरे नशे का फायदा उठाकर मेरे कंधे पर हाथ फेरने लग गया था। प्रदीप के इस तरह से हाथ फेरने पर मुझे एक तेज झुनझुनाहट अपने शरीर मे महसूस हो रही थी। कुछ देर बाद प्रदीप अचानक से मेरे पास आया और मुझे किस करने लग गया था। मुझे प्रदीप की यह हरकत अच्छी नही लग रही थी इसलिए मैंने उसे अपने से थोड़ा दूर कर दिया था। कुछ देर बार प्रदीप फिर मेरे करीब आया और मुझे अपनी बाहों में जकड़ते हुए मेरी कंधे, गले और बूब्स के ऊपर से उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया था।

प्रदीप की इस तरह की कार्रवाई से मेरी उत्तेजना काफी बढ़ने लगे गयी थी, ओर नशे में होने की वजह से में खुद को रोक भी नही पा रही थी। इसके बाद मैं भी प्रदीप के होंठ पर होंठ रख कर उसे चूमे जा रही थी। प्रदीप बिल्कुल बेरहमी से मेरे शरीर को चूमते ही जा रहा था और मुझे ओर भी ज्यादा उत्तेजित किये जा रहा था। कुछ ही देर बाद प्रदीप ने मेरी हॉट रेड ड्रेस को उतार कर मुझे पूरी तरह से नँगा ही कर दिया था। अब प्रदीप मुझे बिस्तर पर लेटा कर मेरी योनि के साथ खेल रहा था। प्रदीप अपनी उंगली को मेरी योनि में डालकर उसे अंदर-बाहर करते हुए मुझे चोदे ही जा रहा था। इस दौरान मेरे मुंह से तेज “आह आह ओह्ह अम्म की तेज आवाजें निकले जा रही थी। अब प्रदीप ज्यादा इंतजार ना करते हुए आगे की कार्रवाई को अंजाम देने के लिए पूरी तरह से तैयार था। कुछ ही देर बाद प्रदीप भी अपने पूरे कपड़े खोलकर नँगा हो गया था। प्रदीप ने पहले तो कुछ देर तक अपने ओजार को मसलते हुए लम्बा किया और फिर मेरी चुत की दीवार में ले जाकर उसे रख दिया था।

उस समय मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही चीज़ चल रही थी कि मैं अब अपने ब्वॉयफ़्रेंड से पहले किसी ओर से चुदने वाली हूँ। इससे पहले की मैं उसके लंबे लन्ड के लिए खुद को तैयार करती की अचानक ही प्रदीप ने एक ही झटके में उसके पूरे लन्ड को मेरी चुत के अंदर उतार दिया था। इस अचानक कि कार्यवाही से मेरी से तेज चीख निकल गयी थी। लेकिन प्रदीप अपने लंड को अंदर बाहर कड़ते हुए मुझे गपागप झटके देते हुए चोदे जा रहा था। मैं दर्द की वजह से रोते-रोते हुए प्रदीप से दूर होने की कोशिश किये जा रही थी। प्रदीप मेरे मुंह को बंद कर के मुझे मशीन की तरह चोदता ही जा रहा था। 20 मिनट में प्रदीप ने मुझे अलग-अलग पोजिशन में चोद कर मेरा पानी ही बाहर निकाल दिया था। ऐसे ही दर्द से चुदते हुए मुझे पता ही नही चल रहा था कि मेरा दर्द कब मजे में बदल चुका था। अब मैं अपने एक हाथ से अपनी योनि को मसले जा रही थी और प्रदीप झटके देते हुए मुझे लगातार चोदता ही जा रहा था। उस दिन मैं रात भर प्रदीप के ही फ्लेट में रही थी और इस दौरान रात भर प्रदीप ने मुझे करीब 3 बार चोदा था।

अगले दिन प्रदीप ने मुझे अपनी पर्सनल सेक्रेटरी ही बना दिया था। अब मैं दिन भर प्रदीप के साथ रहकर ही काम किया करती थी। प्रदीप के साथ रहते हुए मैं अपने ब्वॉयफ़्रेंड को पूरी तरह से भूल ही चुकी थी। कुछ दिनों तक तो मैं, ओर प्रदीप साथ मे ही रहे और फिर कुछ ही दिनों में हम दोनों ने एक दूसरे से शादी कर ली थीं। शादी के बाद ही हम दोनों ने हनीमून के लिए दुबई जाने का फैसला कर लिया था। फिर आखिरकार, वो दिन आ ही गया था, जब हम अपने हनीमून के लिए दुबई निकल चुके थे। दुबई में हमने एक आलीशान रूम बुक करवा रखा था। जैसे ही होटल में पहुंचे और रूम के अंदर गए तो हमारा सब्र तो जैसे टूट ही गया था। हम दोनों ही रूम में पहुँचकर एक-दूसरे को इस तरह से देख रहे थे, जैसे सालों से ही हम चुदाई के बहुत ही भूखे हो। फिलहाल तो हम दोनों काफी ज्यादा थक चुके थे, इसलिए हम दोनों एक साथ नहाने के लिए बाथरूम में चले गये थे।

बाथरूम में शावर के नीचे जैसे ही हमारे शरीर पर गर्म पानी गीरा तो हमारी थकान तो पूरी तरह से उतर चुकी थी। शावर के नीचे मेरा शरीर एक दम टाइड ही चुका था। मेरे भीगे हुए जिस्म को देखकर प्रदीप का लंड भी खड़ा हो गया था, जिसे मैं उसकी पेंट में आसानी से देख सकती थी। अब हम दोनों से बिल्कुल भी इंतज़ार नही हो रहा था, इसलिए हम दोनों में बाथरूम ही एक दूसरे के जिस्म को चूमना शुरू कर दिया था। हम दोनों किसी भूखे भेड़िये की तरह एक दूसरे को लगातार चूमते ही जा रहे थे। इस दौरान प्रदीप मेरे बड़े-बड़े बोकब्स को पकड़ कर मेरे निप्पल के रस को चूसता ही जा रहा था। इस दौरान में प्रदीप के सर पर हाथ फेरतें हुए उसके उत्साह को बढ़ाती ही जा रही थी। प्रदीप की उत्तजेना काफी तेजी से बढ़ती ही जा रही थी, क्योंकि मैं बार-बार प्रदीप के लंड को अपनी योनि से टकराता हुआ महसूस कर रही थी। कुछ ही देर के अंदर मैं घुटने के सहारे बैठ गयी थी। अब मैं प्रदीप के 7 इंच के ओजार को मसलते हुए अपने मुंह मे लिए जा रही थी। प्रदीप का पंड काफी बड़ा था और उसका लन्ड बार-बार मेरे गले तक पहुंच रहा था। कुछ ही देर में प्रदीप का सब्र टूट गया था। प्रदीप बिल्कुल अब किसी जानवर की तर्ज तरह बर्ताव कर रहा था।

कुछ देर बाद ही प्रदीप ने मेरे बालों की पकड़ा और जोर-जोर से झटके देते हुए मुझे अपना लन्ड चुसवाने लग गया था। प्रदीप की इस कार्रवाई के कारण मेरी सांस दो मिनट के लिए रुक ही गयी थी। सेक्स को थोड़ा और मजेदार बनाने के लिए में प्रदीप के लन्ड को बार-बार अपने बूब्स के बीच मे रख कर उसे रगड़े जा रही थी, जिससे प्रदीप का लन्ड ओर भी ज्यादा कड़क होता जा रहा था। मेरे बूब्स में प्रदीप का लन्ड रगड़ने से उसने एक बार तो मेरे बूब्स पर ही अपना गाढ़ा वीर्य ढोल दिया था। लेकिन गजब की बात तो यह थी कि प्रदीप का लन्ड अभी भी काफी कड़क लग रहा था। प्रदीप अब ओर ज्यादा इंतजार नही कर रहा था, उसने तुरंत ही अपने 2 उंगलियों को मेरी चुत के अंदर डाल दिया था। अब वह अपनी उंगलियों को अंदर बाहर करते हुए मुझे केवल उंगली से ही उत्तेजित कर रहा था और शायद वह इसमें काफी हद तक कामयाब भी होता नजर आ रहा था। करीब 10 मिनट तक तो प्रदीप ऐसे ही ही मेरी योनि में उंगली करता रहा और फिर अचानक से मेरी चुत में से मेरा कामरस निकलना शुरू हो गया था।।

मैं प्रदीप के लन्ड को अपनी चुत में प्रवेश करवाने के लिए पागल सी होती जा रही थी। आगे की कार्रवाई को अंजाम देने के लिए में प्रदीप का उत्साह बढ़ाते हुए कह रही थी कि “प्रदीप मुझसे ओर इंतजार नही हो रहा है, मुझे जोर-जोर से चोदो प्लीज”। इतना सुनकर ही प्रदीप ने मेरी एक टांग की पकड़कर अपने हाथ मे उठा लिया था। इस वजह से मेरी चुत का छेद ओर भी ज्यादा चौड़ा हो गया था। अब प्रदीप की मदद करने के लिए मेने उसके लन्ड को पकड़कर अपनी चुत की दीवार पर ले जा कर रख दिया था और बाकी काम प्रदीप ने एक ही झटके में कर दिया था। प्रदीप ने एक ही झटके में अपने लन्ड को मेरी चुत के ऊपर रखकर मुझे गपागप चोदना शुरू कर दिया था। इस दौरान मेरे मुंह से तेज चीख निकल जाए रही थी, जिसकी आवाज़ पूरे रूम में सुनाई दे रही थी। उस दिन प्रदीप ने काफी बार चोदा था और फिर उसके बाद हम तैयार होकर दुबई में घूमने के लिए चले गए थे।

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